नेक और थमौ रजनी
नेक ओर थमौ रजनी रस-वारी।
अबहु तनु मिलै नाय सगरै,मनहु भए है रीतै,रस सौ भरि नाय उर गगरी,अब लौ योई खारि - खारि।।०नेक।।
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पुहुप उडै फिरै बस भँवरै,छूवत फिरै फिरै भीतै,बूंद पराग पियौ नाय रस की,गई यामेई रजनी सारी।।०नेक।।
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नैन कहै कछु ओर निरखि लै,कर बिनु छुए न सितै,अधर कहै रस अधर पहिलै,द्वंद भयौ येई भारी।।०नेक।।
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समर आरंभ सलोल विलास कौ,हारै अबहु ना जीतै,तनिक थमौ रस खेल होन दो ,काहेहु जल्दी तारी।।०नेक।।
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मानेहु बात "दासी प्यारी" की,तब लौ री तू जि-तै,सुख सखिन समाज के सुघर लडैति की,लए बला सब तारी।।०नेक।।०
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