सखी घिर आयी घटा घनघोर
सखी! घिर आई घटा घनघौर,,चलौ हित झूलन कै।
प्यारी! घिर आई घटा घनघौर,,चलौ हित झूलन कै।
देखि नाचत मनवा मोर,,चलौ हित झूलन कै।।
नील गगन अरू श्यामल तन,प्रीत उरमै उठत हिलौर,,चलौ हित झूलन कै......
कर जोरि करू बिनती तोरि,हाँक दैवे कोकिल मोर,,चलौ हित झूलन कै.........
सूनौ डोल कदंब जमुना तट,बैठि भाग बढावौ मौर,,चलौ हित झूलन कै......
उर है अधीर करन गलबैय्या,नाय तरसावौ अब होर,,चलौ हित झूलन कै......
नैन ठाय नेक देखो प्यारी,चाकर सौ किस बात मरोर,,चलौ हित झूलन कै......
ओट घूंघट मुस्काय दी किशोरी,भाँति खिलै पंकज पिय भोर,,चलौ हित झूलन कै......
"प्यारी" छनहु मान मनावन छनमै,लीला योई नित करत किशोर,,चलौ हित झूलन कै......
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