बहै नैनन बिन पानी

बहै नैनन बिनु पानी।
अदभुद रीत प्रेम पंथ की,अथाह अनंत कहानी।
बिरह ताप भसम सबही की,कैसो बच्यो रहे पानी।
दिखाव देख पीर सकू नी,सकू नाय नैन बहानी।
बतावौ कोउ पिय कितहु,हाय मिलै न मिलानी।
"प्यारी" विरथ गमायौ पुनिही,पुनिही पिय सतानी।

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