सेज शोभा रस

सेज शोभा रस सौ गई बाढि।
बिनु प्राणन की प्राणन आए,जई प्यारी प्रीतम सौ गई आडि।
अतुल सरस रस नीरस सी पाई,बरसै ज्योई युगल आपस रस लाडि।
मूक तै भई मधुर रागिनी,नुपुर पद केलि अडै जई बाजि।
सोई भाँति भावित भई "प्यारी",किरपा करि जोरि हिय गई साजि।

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