कहत न बने

कहत नाहि बनै

कहत नाहि बनै।
वा मुख कौ बात,जिन राधा कहै।
वा श्रृवणा जौ सुनत,नाम रसभौरी रहै।
वही है सुफल नैन,जिन जौरी निरखै।
नासिका है वही जिन,पायै नाम भरकै।
उन्ही कौ कहौ कर,जौ माला गुथाहै।
है पग वोही जौ,राधा टहल उठाहै।
दैहि है सुफल बस,उन्ही की जानौ।
राधा जगतौ राधा प्यारी,सौबत ही कहानौ।

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