कौन विधि रिझयो

कौन विधि रीझ्यौ
कौन विधि रीझ्यौ गिरधर नागर।
हिय मैरो नाय शबरी जैसौ,प्रेम प्रतीक्षा हौवे।
नाय प्रेम भाव मीरा जैसौ,भई बाँवरी तजि सबै देवै।
द्रौपदी सौ नाय टेरन आवै,पिय चीर बढावन आवै।
नाय माँ जशौदा सो प्रीत करिहै,लई अंक सौ लाड लडावै।
गोपिन राधा कौ चरण धूरि नाय,ऐकौ पिय सुख सबहि है जावै।
झूठ्यौ साँचो प्रीत प्यारी करिहै,कैसौ पिय प्यारौ कौ रिझावै।

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