वृन्दावन बसि जावूं

वृंदावन बस जावू
ह्यै ब्रजरज वृंदावन बस जावू।
पाम धरे युगल हिल मिलहि,चरण लपट ही जावू।
संत रसिक बिन पाहुन डोले,ठोकर ताई चरणन पावू।
कबहु उच्छिष्ट मिले सुभाग सौ,भरि भरि पेट मै खावू।
कोमल अतिहि कोमल होहू,जुगल चरण सहलावू।
आनंद पावे धर पद मौ पर,सोई नवल किशोर रिझावू।
पवन वेग सो उडिहि बेगि,अंग युगल बस जावू।
प्यारी बिनती कदसी सुनिहौ,बसि वृंदावन जावू।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया