थमि थमि बिरहानल दाहै

थमि थमि बिरहानल दाहै।
सगरी करौ पिय राख की ढेरी,ह्यौ च्यौ ऐसौ आधही जरायै।
पौन बूंदी लगै शूल सी उरपै ,बिनु तौ न मोय  सुहायै।
निगौरी कैसी जु रीत प्रीत की,साँचौ प्रेम मिलन ना पायै।
"प्यारी" न जानत कहा जी केसौ,एक जानै पिय मिलौ आयै।

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