तीज
तीज हरियाली सावन आई।पिय चौप झूलन उर छाई।
कही प्यारी संग झूलन जो आवौ।नार परब बनि नार मनावौ।
अति व्याकुल पिय मानै बाता।लगा पिय सखिन सजावन ताँता।
नथ बेसर टीकौ माँग लगाईँ।सर चूनर दिठौना कपोल सजाई।
कही श्यामा सखी मुरली का करेगी।दीजौ सखी सो चौकस धरैगी।
संग बैठे दोउ सखियन भाँति।निरख भई शीतल सखी छाती।
बारि-बारि सखी संगै झूली।उर कलियन सबकी अज फूली।
भौर ते साँझ भई झूलत ही।झूलत झूलत नाही भरत जी।
दोहा--तीज निराली कुंजन को,पिय प्यारी संग होई।
"प्यारी"सखी सहेली संग,दरश चहै नित योई।
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