नैना तरसै बिनु दरसै रमणा
नैना तरसै बिनु दरसै रमणा।
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भए गए सूखत नैन पतनारे,परै नैनन मौरे हुलसै रमणा।
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घर-बार साज सिँगार ना भावै,गए छाडि कै मौहे जबसै रमणा।
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सेज शूली सौ विष सो जीवन,जावै करि ना निबाह हमसै रमणा।
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आवौ अबई मौरि सुनिकै अरजी,"प्यारी" चालौ लिवाकै सबसै रमणा।
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