सद्गुरु दोष न

सद्गुरू दोष न
रे मना,सद्गुरू दोष न धरिहै।
युगल रूप सद्गुरू मा आए,इन्ही चरणन गहिहै।
बैठि चरणन चापत रहिहै,धो चरणोदक लईहै।
मारग जोरि सहज दिखावत,पाछे ही चलिहै।
कहि ह्रदय अंकित कर लिजै,नेक नाहि टरिहै।
लात पडै बडभाग जानिहै,चरणा नाहि हटिहै।
नाम जपन सेवा इन्ही करिहै,आनंद इन्ही दइहै।
प्यारी भली बुरी जैसौ तिहारी,गुरूवर नाही तजिहै।

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