ह्यो तजि जो तो मिलिहौ

ह्यौ तजि जो तौ मिलिहौ आनंद,कबहु ना मिलिहौ गिरधारी।
उर बस पर होइकै बिबश,छाडी जावै करनौ ना पुकारी।
जई करू बिनती ह्यौ दरशन तो,अइयौ नाय जानिकै बिचारी।
नैन बरसावू जोई छुपि सम्मुख तौ,जानौ परयौ तिनकौ नैननि म्हारी।
एकटक निरखू जो छबि थारी तो,रही बसना भूषण ह्यौ निहारी।
लिखि-लिखि धरू पाति हित तौ जो,पढिहौ ना विरह व्यथा खारि।
मुस्कनि खिलि अधरनि थारे चाहवू,करू करनौ परै जोई "प्यारी"।।

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