रमण दीजौ अबकै नाही लौटाए |

रमण दीजौ अबकै नाही लौटाए |
खइयौ तरस दशा पिछली हमारी पै,भाँति वैसौ दीजौ नाही दुराए |
बैठियौ डारि ना पट इस बारी,दीजौ मौहै सौहणी सूरत दिखाए |
रखियौ याही या संग चालौ मौरै,यातौ लिजौ अबकै प्राण छुडाए |
मुख ना छुपइयौ रौवती दैखि कै,नाही बैठौ अबकै मौन धराए |
तौसौ कछु नाही छुपी म्हारी रमणा,तबहु काहै प्यारी बिरह सताए |

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