नैनांसु म्हारै भरि भरि आवै नीर।

नैनांसु म्हारै भरि भरि आवै नीर।
बरसै याद उन भादौ सावन सौ,लागै उन याद उर बिरहा तीर।
कारे मेघ जई घिर घिर आवै,रोवै म्हारै मन को मोर हौ अधीर।
जतन करि सब हारी गई मै,मैटे नाही कोउ म्हारै मन कौ पीर।
अजहु आवै पिय कलहु आवै ही,आस झूठी मन कौ धरावै ना धीर।
अबहु छाडि दई चाह जीवन की,"प्यारी" चहै तोड उडि पिंजरौ शरीर।

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