लली भौह सैनन अतिहि तीखे
लली भौह सैनन अतिही तीखै।
तरसावै ललचावै पिय अति तरपावै,तऊ रहै उर प्रियतम नीकै।
हरषाय मुस्काय प्रीत लाल बरसाय,उर भाव सब इनसोई दीखै।
जई मान तनि जावै पिय उर बनि आवै,धनु एकई जासौ पिय भीतै।
मद रंग भरिकै पिय जई देखिहै , धीर खोय पिय ढुरै रसहीपै।
रंग रस ऐसै दूजौ ना जैसे , "प्यारी" इन्ही कौर कृपा नीचै।
Comments
Post a Comment