कौन सो हमसों नेह

कौन को हमसौ नेह।
रूपमती ना भोरी सखी ना,कोमल कंज सी ना देह।
बडै गाम की ना गाम नाम की ना,सजि सज्जा नाय गेह।
मधुर भाषिणि ना मृदु हासिनि ना,चटक मटक नाय हैय।
याए तै " प्यारी" इकली बेचारी,परी भूमि रही रोयै।

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