चहुँ मनै सखी फागुन

चहू मनै सखी फागुन साँवल संग।
ओरहु संग बड्यै दिन लौ मनाई,निज पी संग खेलू- री अबिकै रंग।
सोचत ही अब लौ गई रहई,सारी कसर निकारि लेऊ जिति कै जंग।
बहौत जनम " प्यारी" पिय तरसाई,रंगी देओ मोरी चूनर अबिकै तौ रंग।

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