बाल क्रीड़ा
बाल क्रीडा
कन्हैय्या कलिन्दी कूल कन्दुक खेले।
जमुना तीरे सखा संग लै करत लाला किलोल।
एकु गैंद उछारत सखै सखै जमावत कटि धौल।
कबहु चढि जात कूदि कमरिया कदै मारि भगी।
उछारि जोरि ऊचै कन्दुक पकरि दुजै लगी।
ऐकौ कर लेवत खिझाावै सखै दिखावे मटकात नैन।
दै सखा गारी बोलिहै बोलिहै अटपटे बैन।
भरन अयी जलै युक्ति जोहवे लाल कौ बाट।
ठाडी प्यारी उहा ओट बिटप लै मटुकी माट।
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