एकत्व की है रात

एकत्व की है रात , रास......
एकत्व पूर्ण अपूर्ण का,सिंधु मे बिंदु पूर्णतः
सर्वस्व सर्व सर्व को,विस्मृत विस्मृतियो का भी भान।
इसी एकत्व की है रात, रास.....
अंत अनंत की सत्ता का,नश्वर शाश्वत सत्यता
परमानंद संग आनंद का,स्वर रागिनी सरगम मिलान।
इसी एकत्व की है रात, रास.....
जडत्व मूल चेतना,निर्मल प्रणय नेह का
नींव का निर्माण तक,शशि रश्मियो का एकत्व प्रयाण।
इसी एकत्व की है रात, रास.....
विशाखाओ से मूल का,कल्पनाओ से वास्तविकता
क्षणिक से सदा सर्वदा,और सहजता के संग गुमान।
इसी एकत्व की है रात, रास.....
"प्यारी" पिय अनंत का,तृषा जलधि अरिहंतता
विधि विधान विशेषता, संग कदाचित  समाहित प्रमाण।
इसी एकत्व की है रात, रास.....

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