चाह चाही होवै तिहारी
चाह चाही होवै तिहारी,ऐ जी गिरधारी।
मति मंद मोरि आछी काची जानू ना,चलू तोरे उरहु पिछारी,ऐ जी गिरधारी।
जग भरमा लए मोहे पल पल हु,उर डोर तौहे पकडा-री,ऐ जी गिरधारी।
करि करि देखि मन मोरि अब लौ,अब थमि कै तौहे पुकारि,ऐ जी गिरधारी।
समुझ आवै नाय तऊ"प्यारी" कहवै,किजौ मनहु एक विचारी,ऐ जी गिरधारी।
Comments
Post a Comment