जानू मन की
जानू मन की
अली! जानू तौरे मन की बात रे।
आवत जावत उडत गुंजै,रसही पिबतौ उडीही जात रै।
लौभी बड्यौ रसराज रस कौ,पाछे कहवतौ नाही सुनत रे।
प्रीती अति झूठ्यी दिखावत,रस पीवन काज आवत रे।
ठौर एकहु नाय तेरौ,अजु इहा कल उहा मिलत रे।
इकली जानी कली रस लूटत,लूटत सबहि नाय जानत रे।
ऐसौ अली तोय प्यारी जानती,हिय ना बदलौ कदै करत रे।
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