जिन ह्रदय जे रस स्वाद लगा।
स्वर्ग लोक ध्रुव सुख जगत के,तज सबन कू सोई इन ओर भगा।
जीवन मरन रौन हसन कोउ का,भए तो भए इन कछु ना पता।
बात जगत उर लौ नाहि आवै,भाँति रहै यो ज्यौ जल तेल हता।
खान पीन सौन जगन श्वास ऐही,मिले तो कुशल ना तो बुरी हो दशा।
सखी"प्यारी" इन किरपा गावै इनकोई,इन हित इनमे सदा ओर रहयौ फँसा।
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