बसि गयो उर गाढ़े नन्दकिशोर
बसि गयौ उर गाढै नंदकिशोर।
घुसि उर कर लए बंद किवारी,तापै सखी मार लई साँकल ओर।
इत्त उत्त फिरू अरू नैन बचाती,पाछे पाछे फिरै सखी साँझ तै भोर।
बहोत सताई मोय अब लेऊ बदलौ,कहे करे कछु नाय देखू नैन कोर।
खरी खोटी "प्यारी" सबहु सुनोगे,ऐ जी सुनोगे बजा अब ढोल जोर।
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