नेक धीमे धीमे बरसो

नेक धीमै धीमै बरसौ।
भीजत दोउ सुकुमार लाडिलै,भीजत अतिही हरषौ।
कोमल गेह वेगित परतई,लगिहै नाहिही शर-सौ।
पाई अवकाश करिहौ गर्जन,सुध-बुध लौटावौ दरसौ।
अरे भावित जलधर अलबेले,"प्यारी"-प्रीतम प्रेमणि झरसौ।

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