पीवै ज्यौ त्यौ बढै सौगुनी,
पीवै ज्यौ त्यौ बढै सौगुनी,प्रेम कौ प्यास रंगिलौई जानै।
रस दैवन रस लैय परस्पर,सु-विधि नव जौरि उर आनै।
रंग मगे बधै रहै गाढालिंगन,तापै आकुल रहै न-मानै।
पिय प्यारी दौऊ रंग रंगीलै,रहै उर भाँति भाँति लिपटानै।
रस खावन पीवन सरबस रस,प्यारी नाय नैम दूसरौ चाहनै।
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