दर्शनः देयो मोहे

दरशन देओ मौहे जुगल किशोर।
रंग केलि के लिपटै आपस में,नैनन बसौ योई करत खिलोर।
दौरत भाजत अरू रीझत भीजत,कुंजन विहरत डूबै रस घोर।
घडि घडि श्वास घटतोई जावै,करियौ बेगि करूणा की कौर।
विनती करत कर फैलाकै "प्यारी",तरसावौ नाहि मौहे अब होर।

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