रे बदरा काहे नीर
रे बदरा! काहे नीर बहाए।
कोउ निरमोही तजि-कै तौहे,कहा दूरि देस पठाए।
रूठि गयौ प्रीतम -का तौसो,मानै नाही मनत मनाए।
या है ऐसौ मेरे-हु जैसो,तैने छलिया जी बसाए।
तुम सोई मैरो-ना अपनौ,जौन सौ पीरा सुनाए।
दशा एकसी म्हारी-जी थारी,"प्यारी" निज छबी-तौ पाए।
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