सद्गुरु कृपा

सद्गुरू कृपा
सद्गुरू कृपा अनंत।
साँचौ प्रीत जानन वारो,मन प्राण चरणन जाय डारो।
प्रीत रीत सिखावन वारे,सद्गुरू चरण चित्त लगा रे।
पकर बाँह सखियन संग बैठाए,टहल महल को दए सिखाय।
प्रीत रीत सिखाय दीजै,चेला बीज वृक्छ कीजै।
निज चरणा छायाहि राखै,पाप पुण्य निछार या पै।
प्यारी सद्गुरू प्रेम पायौ,सद्गुरू हित दास बलि जायौ।

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