कही साँची
कही साँची माय,ह्यौ तौ भगतनि नाय।
लगावै भगत तौ भाल पै टीकौ,भरू माँग मै तौ उनकी चरण रज लाय।
करत दान पुन भगत तौ भारी,ह्यौ तौ उनसोई प्रेम दान नित पाय।
भगत धारै चोला भगवा उन हित,उन हित राखू मै तौ आप कौ सजाय।
"प्यारी" मै तौ दासी सखी सी उनकी,भगत तौ मौ सौ माय बनौ नाय जाय।
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