प्रेम उपवन

प्रेम उपवन कैसौ बात सुनो।
केलि सेज भूमि उपवन की,जा पै खिलित रस कै प्रेम तनौ।
रस कै विटप लगे बरन द्वो कुसुमा,दुई देह धारै है एक मनौ।
सखिन सहेली सब मालिन होई,रस कुसुमा को योई सेवत रह्यौ।
अणु उपवन को "प्यारी" जरा सी,किरपा बल इनकै भावित भयौ।

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