आवे नाहीं रमणा
आवै नाही रमणा।
आवै ना.....आवै ना....हाय! आवै नाही रमणा।
दिनहु गयौ चढी रैन अंधेरी,आवन अब लौ हमै सुनि-ना।
बदली याद घिरी अँसुवन लाय,लावै उनहु कदि संग-ना।
राह तकत अब रौवन भूलै,पाथर नैन नीर बहवै-ना।
किते दरश जुग बीतै अनंता,पल जुग भाँति काटै कटे-ना।
दीजौ दरश अरू सुनियौ बिनती,"प्यारी"नैन उर नाही हटना।
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