श्यामा गा

श्यामा गा

गा रे मन श्यामा श्यामा गा।
बहुत जनम विरथा गमाया,अबहु रे प्यारी कौ गुण गा।
पूंजी प्रेम को भर लै झोरी,इन्ही सौ प्रीत लगावत जा।
सैबा कोऊ कछु इनको करि लै,सैबा हित तन मन वारत जा।
प्यारौ की प्यारी प्यारी कौ प्यारौ,दोऊन नाय एक रूप समुझा।
करि धरि शीश अबहु रे प्यारी,पिय प्रीतम जय जय जय जय मना।

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