बैचारौ जिवरौ भयो लचार।
बैचारौ जिवरौ भयो लचार।
पंखनि कटै खग भाँति तडफै,भरि सकै पी कौ देस ना उडार।
बनावै महल नित रेती सुपने,सुपन ही बुनत लैवे मन की निकार।
हटावू उनसौ तो हटवै ना आवै,हटै तऊ होवै रोईकै बेजार।
"प्यारी" पिय बिनु ताप सतावै,दरस दे करै रमणा उपचार।
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