प्रेम डोर
प्रेम डोर
बंधत हरि प्रेम कौ डोर।
रटत नाम जिन कटत दिना,होवत रैन भौर।
ओरि रज्जु नाय बंधिहै,प्रेम डोरि लाय।
दुई अंगुरि सबै छोटी रहिहै,प्रीत डोरी दये बंधाय।
तोरनो नाय जानिहै प्यारौ,बंधौ रहनौ सदा च्हाय।
विवश प्रेमहि जानिहै,जोई दहिहै सोई खाय।
जहाँ पैठाए पैठिए,जित लइहौ तितहि जाय।
बंधे आपु ता पै काटिहै,सकल भव फंद कटाय।
प्यारी पिय बिनती करे,बंधि जइयो हिय मोरे आय।
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