बाल लीला

बाल लीला
काय नाय बढिहै हमारौ चोटि।
संगे सखान को हाथ हाथ लौ,हमरि रहिहै अंगुरी भर कौ।
कही माई तैने दूध पीवन सो बढिहै,रैन दिना पीवू तबहि नाटी रहिहै।
पीरोय नाय सकू कुसुम मोती,छोटौ सो हमरी रहि गयी चोटी।
सुनि मैय्या हसि झोरै आई,भर बेला दूध कजरी कौ लाई।
देखि लाला दूध पीवतौ देखिहै,जेई अंगुरि भर दूध सौ होहिहै।
भरि भरि बेला दूध पीवतौ,जाई जाई पीबतौ ताई ताई बढतौ।
सुनि लाला दूध पीवन लगिहै,संग संग चोटी टटोलत रहिहै।
बढिहै का नाहि देखे बारि बार,प्यारी लला लीला ह्यै जाय बलिहार।

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