उठि उठि देख्यो रैन
उठि उठि देख्यू रैन
उठि उठि देख्यू रैन,पिय आय तो न लौट गयो।
सुवती दैख्यी कदै पिय जी,मान धार नाय बैठ जयौ।
कबहु न ऐसो होवै प्यारौ, चुप ठाडै झोरै बैठ गयौ।
बौल्यौ नाही जगहिहौ नाहि,आप ही आप निहार लयौ।
खुल्यै अधखुल्यै नैना निहारू,समुझी पिया भीत पकड्यौ।
देख्यौ नाही पीय आवतौ,मारी मनहु बैठि गयौ।
आवौ जी सरताज हमारौ,कदसै बैठी प्यारी बुलायौ।
Comments
Post a Comment