नेक खावे न तरस रमणा

नेक,खावै ना तरस रमणा हमपै।
देख,दुर्गत जग मौरि नेक ना पसीजै,नाही कहै धीरज हित बोल मुख तै।
छाडि,बीच जग इकली आप भग जावै,बोलै एकहु बोल नाहि ओर हमतै।
तऊ,काहै सुनौ मौरे ताने उलाहनै,दैके विष छुडवाओ पिंड प्यारौ हमसै।
पीरा,सह्यौ नाही जावै अब "प्यारी" सौ,दीजौ बात निपटाय कछु भी करकै।

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