पिया मोहे लिटा दीजो
पिय मोहि लौटा लिजौ निज नगरी।
देस पराए बहौत टिकाई,राज प्रेम लिजौ बसाय अब जी।
खज खबर लिन्हीहु नाही,चार दिन-हु च्यौ नजर बदरी।
इकली जानिकै जगनै सताई,जगत कौ दीजौ बताय ह्यौ तुम्हरी।
परेही सींवा सहनौ होई,दीजौ नाय सहवै "प्यारी" कछु अब जी।
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