हरि सम्मुख रोई

हरि सम्मुख रोई
नाम लेओ हरि को,हरि सम्मुख कातर रोउ।
किये कोटि औगुन प्रभु,करत अजहु हौउ।
दीनानाथ मोय समुझ मोल चाकर,औगुन मेटाय देउ।
प्रभौ मोय पावन करिहै,निज कुंजन ही रख लेओ।
भव सिंधु डूबत हमहौ,हे स्वामी आय बचाओ।
प्यारी तज झूठौ मद अभिमान,तबहि प्रभु बेगि आय।

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