मथुरावासी
मथुराबासी
काहै को छाडि भयै मथुराबासी।
भयी कहा बात प्रीत तौरि,जाय मथुरा कुब्जा सौ जौरि।
कहा मिलिहौ कलूटी कुब्जा सौ,देखि कुबरि जो अनाथ छौरि।
जावतौ च्ह्यौ रूपमति लौ जातौ,कौन कुरूपीनी संगै प्रीत जौरि।
मिलिहै कबहु जाद सबरी भुलाउ,कपटिनी कू सिखावू बननौ भौरि।
साँची कहिहौ लाल कौन बात रूठ्यौ,कौन काज भयौ मथुरा बैरि।
होहिहौ हमहु सौ सुख नाहि वा कू,हमहु सताइहौ जा कू बड्यौ री।
जाय रहिहौ मथुरा आनंद सौ,नाय करिहौ जाद ग्वारिन गोरि।
करैजौ मुखहु सुनति बैन आवै,कैसेहु धीर धरिहै ठगौरि।
आय मिलिहौ नंदनंदन बेगिहि,राह देखिहै गोप ग्वालिन तौहरि।
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