मिली रमणा सौं अतिहि भौर में

मिली रमणा सौ अतिही भौर मे।
बाढि अतिही उर दिन वा उदासी,पुकारी बुलाय ही गयी सौवत मै।
आध जगी सोयी आध भौर होयी,बेला शुभ जई आए नैंंनन मे।
वोई मुस्कनि वोई श्याम रंग प्यारौ,वोई बरसत रस अंगनि होर ते।
नैन भरि आए कही कबहु ना छुई,एकहु बेर तो दीजौ छूवन मै।
निकट अति-सौ छुई भूली का प्यारी,सदा-ही रहिए भरी तू मौ-तै।
साँची भए याए देखि "प्यारी" सुपना,जोई होइए प्यारी प्यारौ प्राण ते।

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