उर होय अधीर नैन दुखे जी
उर होय अधीर नैन दुखै जी,मारग लगै हित आन तिहारै।
अरू सावन मरूत बिजुरी घन,मनौ कटै अंग नौन लगारै।
तौ बिनु झूला ना फूला कंदबन,नाय सुहाय जग साज सिंगारै।
हा!बैरी तापै दृग उर भूलै सब,रौवन होवन पीर बिरहा कै।
जी अबिकै प्राण बचै ना थोथे,गिरि गिरि पुनि नाय "प्यारी" सम्हारै।
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