बही आज कुँजन उल्टी ब्यार
बही आज कुंजन उल्टी बयार।
लए तूलिका प्यारी कर पकरै,रहे पिय सजनी सजावन हित प्यार।
चले ज्योई दीन्ही प्यारी हिराए,मुस्काए पिय पुनिही भए तैय्यार।
चले पुनिही बही पौना ऐसी , कुसुम केश झरिकै दीन्ही बिगार।
उतरा मुख तऊ पुनिही चलिहै,तिजेई गिरौ दल तरूकोई उडार।
भरै नैननि पिय रूठिकै छाडै ,रूठिकै बैठे मुखई प्यारो झुकार।
नेह लाड भरि प्यारी झुकिकै , पिय संग लिन्ही तूलिका सम्हार।
टेढ़ी चितवनि प्यारी पिय देखे,दिन्हे दोउ अघ-जग सबई बिसार।
देखि सखी धीमै तूलिका छुड़ाई,लिन्ही "प्यारी" दोउकी बलाएं तार।
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