कहूं कासों

कहू कासो
आकुल व्याकुल हिय पीर कहो कहू कासौ।
नैन झर झर झरत रैना,नेक हिय न सुनत बैना।
कोउ आवन थारी बात कहै,धरे धीर न जरा रहना।
टेरत टेरत हिय अति व्याकुल,पीर कहत नाही बने ना।
मग जोहवत नैना अधीर भयेही,आवन काय सुनू ना।
हा म्हारौ गिरधर बेगि आवौ,बिनु थारे नाही रहना।

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