कैसो बरनऊँ
कैसौ बरणू दरद म्हारौ।
एक होय तऊ कहि देऊ रमणा,परयौ रोम पीरहु छारौ।
जग पीरा दूजै तुम्हु सुनत नाय,तापै ओर ठौर ना पुकारौ।
अरू नाय होय तऊ तडफै मनवा,ओर दोन हमई गए मारौ।
कहौ पिय योई तडफ का मरिहै,नाय जिवतौ मिलन हो हमारौ।
ऐसौ होय तऊ डोर तोरौ जीवन,"प्यारी"केसौई निज मे मिलारौ।
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