प्यारि जान जान अनजान बने

प्यारी जानि-जानि अनजान बनै।
कही अनकही सबई रही जानत,तऊ चहै पिय के मुख सौ सुनै।
चौप हिय कौ कहवत नाही,बिनु कहै आजु प्यारी जानै ना मनै।
जावत निशिकौ पलहु भारी,पिय अकुलाय प्यारी सैन ना जनै।
विनती करै "प्यारी" नाहि तरसावौ,ढुर पिय उरपै भवौ रस से सनै।

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