सांवल रँग रँगी

साँवल रंग रंगी
सखी री साँवल रंग रंगी।
रंग दूज्यौ छूट्यौ भायौ श्यामल रंग,प्रीत श्याम सो जगी।
चूनर चोली डूबोय रंग दीन्ही,रंगरेजवा श्याम पगी।
जित जित श्याम रंग मोय दीखे,सूझ्यौ साँवलिया की छबी।
दौडी दौडी अंगनै चौबारै जावू,फिरू घर बाहर ही भगी।
कदै कारो रंग देखि बतियावू,कदे जावू लाज मरी।
प्यारी प्यारौ श्यामल गात पे,ढुरी जाय नैन पडी।

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