चले सेज

चले सेज सौ बिहारी बिहारिन।
अंचल लली परयौ दूरि लौ,परी वेणी ज्यू छिटकी नागिन।
रहे गिरह लाल पट मारै,गजरा कुसुम लगै प्यारौ अलकानि।
कंचुकी बंद निकट छाप अंगुरि,कटि लाल नख क्षति निशानि।
शिथिल पद धरै अति धीरे,सुकुमार दोउ रस आरस भीनै।
प्रथम छबी भौर की करिकै,शीतल नैन सुफल "प्यारी" कीनै।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया