युगल प्राणवायु

युगल प्राणवायु
सखी युगल प्राणवायु जानिये।
टहल जुगल नित करत घौमती,सेवा सो नेक नाहि नैन अघाइये।
रूचिर हिय जानी सैबा करती,बिनु सखी युगल नाय पग ही उठाइये।
घौमै चकडौर घिरनी सी कुंजन ही,ज्यौ बिनु डोर पतंग ना उडाइये।
भाव तरंग मोद हिय युगल जानती,उठिहै रूचि सौ पहिलै काज कराइये।
संधि सुलह जुगल करावती,कोक कला निपुणा सबै सखी जानिये।
कदसी टेरती प्यारी दिना बित्यै,अजहु प्यारी कौ सखीही बनाइये।

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