कि ऐसा आखिर क्या लिख दुं
....कि ऐसा आखिर क्या लिख दू???
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हो प्रम पीर जिसमे सारी,आँखो का पानी खारा हो
हर कसक हो जिसमे छोटी भी,दिल खोल के बस जिसमे रख दू.....
कि ऐसा आखिर क्या लिख दू???
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सब कही अनकही बाते भी,पहले से आखिर तक की ही
अब तक के अनंत जन्मो की , प्रतिक्षा की अवधी भर दू..........
कि ऐसा आखिर क्या लिख दू????
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इस विरह अगन की तपिश अति,और वेदना शून्य मे रोने की
हर लफ्ज हो अंगारे जैसा , करू सूरज लफ्ज कहे मन यूं.........
कि ऐसा आखिर क्या लिख दू????
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सच बात मान मेरी "प्यारी", ऐसा तो है बस एक हरफ
प्रेम प्रेम बस प्रेम हि लिख,एक शब्द मे भर सारा जग तू.....
कि ऐसा आखिर क्या लिख दू?????
कि ऐसा आखिर क्या लिख दू????
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